वर्षा काल
पत्थर के टीले पर बैठकर
उमड़ते-घुमड़ते बादलों की
घनघोर घटाओं के सौंदर्य के बीच
पानी की बहती धारा की कलकलाहट में
बहते छोटे छोटे जल जीव
इधर उधर पंख फड़फड़ाते पंछी
तिनका दाना चुनकर वृक्षों पर ले जाते
पानी में फुदकती मछलियां
वर्षा की बूंदों के हल्के हल्के छींटें
जीवन में ताजगी का संचार कर रही हैं
नदियां तालाब वर्षा जल से भर गए हैं
इंद्र धनुष अपनी संपूर्ण सुंदरता के साथ सुशोभित है
मैं टीले पर बैठा प्रकृति की इस रम्यता का आनंद ले रहा हूं '